इस इकाई में अनुवाद की मूलभूत अवधारणाओं का परिचय कराया जाता है। इसमें अनुवाद के अर्थ और विभिन्न परिभाषाओं के माध्यम से उसकी सैद्धांतिक आधारभूमि को स्पष्ट किया गया है। साथ ही, अनुवाद के स्वरूप और उसके व्यापक क्षेत्र पर प्रकाश डालते हुए यह समझाया गया है कि अनुवाद केवल भाषाई रूपांतरण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक सेतु का कार्य करता है। यह इकाई आगे के अध्ययन के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार करती है।
1. अनुवाद : अर्थ, परिभाषा, स्वरूप और क्षेत्र
1.8. अनुवाद के क्षेत्र
अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत और बहुआयामी है। सामान्यतः अनुवाद के क्षेत्रों को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है- (1) साहित्यिक और (2) साहित्येतर। साहित्य का संबंध प्रधानतः भावात्मक एवं सांस्कृतिक पक्षों से होता है। सांस्कृतिक पक्ष जीवन के समस्त व्यापारों में मानव द्वारा स्वीकृत एवं अनुसरित दार्शनिक, धार्मिक, सभ्यता संबंधी तत्वों से जुड़ते हैं। साहित्य का विकास भी अनेक विधाओं में चला है। इन सभी विधाओं में अनुवाद प्रक्रिया सहज रूप से सभी भाषाओं में चलती है और चल भी रही है।
साहित्येतर क्षेत्रों में अनुवाद का आज महत्व बढ़ रहा है। अपरिहार्य रूप से उसका संबंध अनेक क्षेत्रों से जुड़ गया है। सूचना क्रांति (Information Revolution) के इस युग में सूचना तकनीकी (Information Technoloty) के साथ अनुवाद का लक्ष्य बहु संदर्भीय और बहुजन संवेद्य हो रहा है। अनुवाद से संपन्न होने वाले प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं -
1) विज्ञान, 2) तकनीकी, 3) मनोरंजन, 4) प्रशासन, 5) कृषि, 6) व्यवसाय और व्यापार, 7) शिक्षण और प्रशिक्षण, 8) विज्ञापन और 9) समाचार-वितरण।
उक्त क्षेत्रों के अंतर-विभागों से यह सूची और बढ़ सकती है। इन सब क्षेत्रों में विश्व व्याप्त ज्ञान, सामग्री, तकनीकी, विज्ञान आदि की प्राप्ति का एक मात्र साधन 'अनुवाद' ही है। विश्वसनीय और व्यवस्थित अभिव्यक्तियों के लिए अनुवाद प्रक्रिया का सटीक अध्ययन और उसका अभ्यास आज की आवश्यकता ही नहीं, अनिवार्यता भी है।