1. अनुवाद : अर्थ, परिभाषा, स्वरूप और क्षेत्र

1.6. भाषिक व्यवस्थाएँ और अनुवाद

अनुवाद को भाषिक व्यवस्थाओं में चलने वाली प्रक्रिया के रूप में समझा गया है। भाषा मानव द्वारा निर्मित संप्रेषण के लिए सुगम व्यवस्था है। भाषा की संरचना से संबंधित प्रमुख व्यवस्थाएँ हैं- (1) ध्वनि व्यवस्था (2) रूप् व्यवस्था (3) अर्थ व्यवस्था (4) वाक्य व्यवस्था तथा (5) लिपि (लेखिम) व्यवस्था। इन सभी उप व्यवस्थाओं की एक समग्र व्यवस्था भाषा की व्यवस्था है। इनके प्रभावों को पहचान कर समान व्यवस्थाओं में अवतरित करने की प्रक्रिया ही अनुवाद की प्रक्रिया है। भाषा को प्रभावित क्रने वाले कुछ अन्य तत्व भी हैं। इन्हें भाषेतर तत्व कह सकते हैं। ये सारे तत्व भाषा-भाषी समूह या समाज की व्यवस्थाओं से उपजीव्य हैं। इनमें प्रधान हैं (1) संस्कृति और सांस्कृतिक उपादान, (2) भौतिक उन्नति और उसके प्रतीक (सभ्यता के प्रतीक), (3) धर्म की व्यवस्था, (4) भौगोलिक पर्यावरण और (5) सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्थाएँ। ये एक ओर से सामाजिक रूप से नियामक हैं तो दूसरी ओर भाषिक अभिव्यक्ति यों को आनुशासित करने वाले भी हैं। इनके प्रभाव के बिना किसी भाषा में सामान्य या विशिष्ट अभिव्यत्तियों को सोच ही नहीं सकते। इनकी सम्यक अवधारणा और अवतरण की योजना अनुवाद के लिए आवश्यक है ।