1. अनुवाद की प्रक्रिया और प्राविधि

1.16. ज) वार्तानुवाद अथवा आशु अनुवाद

क)    वार्तानुवाद अथवा आशु अनुवाद

वार्तानुवाद अथवा आशु अनुवाद का उपयोग विशेषकर मौखिक रूप से होता है। जब दो भिन्न भाषा-भाषी आपस में चर्चा करते हैं, तो उन्हें द्विभाषी या Interpreter की आवश्यकता पड़ती है। द्विभाषिया उनके बीच चलने वाले वार्तालाप को अनुवाद करके दोनों के बीच संवाद संभव बनाता है। इसे आशु अनुवाद इसलिए कहा जाता है कि इसमें द्विभाषिया को तत्क्षण अनुवाद करना होता है। द्विभाषिया को इस मौखिक वार्ता का सद्य अनुवाद करना पड़ता है। उसे कोई संदर्भ ग्रंथ देखने या चिंतन करने का अवसर नहीं रहता। निश्चय ही आशु अनुवाद करने के लिए अनुवादक को मानसिक रूप से सतर्क और तैयार रहना पड़ता है।

आशु अनुवाद की आवश्यकता आजकल कई क्षेत्रों में हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों, दो देशों के बीच राजनैतिक और कूटनीतिक संबंधों, विदेशी अतिथियों के आगमन, दो देशों के बीच समझौतों, संधियों और इस प्रकार के अन्य कूटनीतिक प्रस्तावों के संदर्भ में आशु अनुवाद की आवश्यकता पड़ती है। किसी भी देश के पर्यटन और अन्य प्रकार के व्यापारिक व औद्योगिक विकास के लिए आशु अनुवाद आवश्यक हो गया है।