इस इकाई में अनुवाद की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों - पाठ के विश्लेषण, अर्थांतरण और पुनर्गठन का क्रमबद्ध अध्ययन कराया जाता है। इसमें अनुवाद की प्रमुख प्राविधियों एवं तकनीकों को स्पष्ट करते हुए उनके व्यवहारिक उपयोग पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही, प्रभावी और सटीक अनुवाद के लिए आवश्यक सिद्धांतों एवं कौशलों को समझाया गया है। यह इकाई विद्यार्थियों को अनुवाद के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराते हुए उनकी अनुप्रयोगात्मक क्षमता का विकास करती है।
1. अनुवाद की प्रक्रिया और प्राविधि
1.10. ख) मूलमुक्त अनुवाद
क) मूलमुक्त अनुवाद
मूल पाठ से बँधे न रहकर लक्ष्य भाषा की प्रकृति और प्रयोक्ता की आवश्यकता के अनुसार अनुवाद करना ही मूलमुक्त अनुवाद है। इसके अंतर्गत भावानुवाद, छायानुवाद, रूपांतरण, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद आदि कई प्रकार होते हैं। मूल मुक्त अनुवाद के संदर्भ में यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई भी अनुवाद पूरी तरह से मूलमुक्त नहीं हो सकता। मूल पाठ का कम या अधिक आधार लेना ही पड़ता है, इस दृष्टि से अनुवाद एक ऐसी प्रक्रिया है, जो रचनात्मक होते हुए भी परिसीमित होती है, क्योंकि अनुवाद मूल पाठ को लक्ष्य भाषा में ले जाने की प्रक्रिया है।