1. अनुवाद की प्रक्रिया और प्राविधि

1.3. अनुवाद प्रक्रिया : अनुचिंतन

अनुवाद प्रक्रिया पर चिंतन आधुनिक युग में अधिक चल रहा है। पहले साहित्य केंद्रित चिंतन चल रहा था। उस चिंतन को भाषा वैज्ञानिकों ने बल दिया। आगे चलकर सभी शास्त्रियों ने अनुवाद की ओर ध्यान दिया। तर्क शास्त्री, अर्थ-शास्त्री, समाज शास्त्री आदि सब ने इस के महत्व को रेखांकित कर चिंतन की धारा को तेजस्वी बनाया है। साहित्येतर क्षेत्रों में अनुवाद की दिशाएँ और चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। अब की आवश्यकता है अनुवाद की प्रक्रिया और प्रविधि को एक समग्र दृष्टि से देखें।

प्रो. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव आधुनिक भारतीय भाषा-वैज्ञानिकों में प्रथमगण्य हैं, जिन्होंने अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों भाषाओं के माध्यम से अपने भाषापरक वैज्ञानिक विचार व्यक्त किये हैं। यहाँ उनके अनुवाद- प्रक्रिया पर केंद्रित कुछ विचार लीजिए-

  • अनुवाद अनुप्रयुक्त भाषिक प्रक्रिया है। अतः उसका एक आयाम उन पाठकों से जुड़ा होता है, जिनके लिए अनुवाद कार्य संपन्न किया जाता है। इसलिए अर्थ संप्रेषण की प्रक्रिया में इस बात की ओर ध्यान दिया जाता है कि अनूदित पाठ युग धर्मी, संप्रेषण-सिद्ध और लक्ष्य भाषा की प्रकृति के अनुरूप हो।
  • किसी भी अनुवाद सिद्धांत के लिए ‘प्रतिस्थापन’ और ‘अंतरण’ की दो प्रक्रियाओं के भेद को ध्यान में रखना ज़रूरी है।
  • अनुवाद स्रोत भाषा के पाठ का पहले ‘विकोडीकरण’ है और इसके बाद कोडीकरण के माध्यम से अर्थ का लक्ष्य भाषा के पाठ में पुर्नगठन है।
  • अनुवाद में अंतःकरण की प्रक्रिया दो भाषाओं की टकराहट से मुक्त नहीं रह सकती। (यहाँ प्रतीक-व्यवस्था के अंतरण को ध्यान में रखना चाहिए)
  • अनुवाद प्रक्रिया में दो भाषाओं के संप्रेषण-व्यापार की अपेक्षा रहती है। इसीलिए इस पूरे व्यापार में दो प्रकार की प्रेषक (लेखक), संदेश (पाठ), ग्रहीता (पाठक) की संकल्पना निहित रहती है।
  • अन्य भाषा में कोडीकृत पाठ को अनूदित पाठ तभी कहा जा सकता है, जब वह प्रकार्यात्मक और संरचनात्मक दृष्टि से मूल पाठ के सहपाठ के रूप में सिद्ध हो।
  • लिखित भाषाभिव्यक्ति मौखिक प्रकार से भिन्न प्रकार के वाक्य-विन्यास और पाठ-रचना की अपेक्षा रखती है।

    अनुवाद प्रक्रिया के चार सोपान हैं-

    (1) पाठ चयन,               (2) पाठ विश्लेषण,           (3) अंतरण और              (4) पुनर्गठन

    ये चारों सोपान विषय क्षेत्र के आधार पर बहुमुखी रूप में विदित होते हैं।