2. साहित्येतर अनुवाद

2.8. सामाजिक विज्ञानों का अनुवाद

साहित्येतर सामग्री का एक रूप है वैज्ञानिक साहित्य तो दूसरा पक्ष है- समाज वैज्ञानिक साहित्य । विज्ञान और वैज्ञानिक साहित्य प्राकृतिक विज्ञानों और मनुष्य व प्रकृति के बीच संबंधों का लेखा-जोखा है तो समाज वैज्ञानिक साहित्य मनुष्य और मनुष्य के बीच संबंधों का आईना होता है। इसलिए समाज विज्ञानों का अनुवाद सूचनापरक होने के साथ-साथ भावपरक भी होता है। यह पूरी तरह तथ्यपरक तो होता है लेकिन उस अर्थ में वस्तुनिष्ठ नहीं हो सकता जिस अर्थ में प्राकृतिक विज्ञान होते हैं। राजनीति, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, दर्शन, मनोविज्ञान, इतिहास आदि के अनुवाद में पारिभाषिक शब्दावली की आवश्यकता तो पड़ती ही है, स्रोत भाषा की छाया से लक्ष्य भाषा को बचाकर एक सहज, सुबोध, प्रभावी अनुवाद प्रस्तुत करने के कठिन कार्य से अनुवादक को गुज़रना ही पड़ता है।