2. साहित्येतर अनुवाद

2.7. पत्रकारिता और जनसंचार माध्यमों में अनुवाद

पत्रकारिता एवं जनसंचार अन्य माध्यमों में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है। जन संचार माध्यमों को दो वर्गों में रखा जा सकता है- इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया या मुद्रित माध्यम । इलेक्ट्रॉटिक माध्यम के अंतर्गत दूरदर्शन व रेडियो में साहित्येतर अनुवाद मुख्यतः लेखों, समाचारों और सूचना - तंत्र की अन्य प्रयुक्तियों में किया जाता है। जबकि मुद्रित माध्यम के अंतर्गत पत्रकारिता आज बहुत विकसित और प्रभावपूर्ण क्षेत्र है । पत्रकारिता का क्षेत्र भी बहुत व्यापक है- जैसे समाचार पत्रों में दिये गये समाचार जिनमें राजनीतिक गतिविधियों से लेकर दुर्घटनाओं तक की ख़बरें होती हैं। समाचार देते समय शब्दानुवाद ही करने की कोशिश की जाती है जिससे मूलनिष्ठता और तथ्यपरकता बनी रह सके। पत्रकारिता की अपनी शब्दावली होती है, जिसका आवश्यकतानुसार निर्माण हुआ है। जैसे खेल-कूद पत्रकारिता में 'गोल', 'रन' जैसे शब्द अंग्रेज़ी से यथावत ले लिये गये हैं, लेकिन कुछ का अनुवाद हुआ है जैसे 'मैच का ड्रा' रहा का भी प्रयोग होता है और 'मैच अनिर्णीत रहा' का भी प्रयोग होता है। 'ओपनिंग बैट्समैन' के लिए 'सलामी बल्लेबाज़' भावानुवाद का उदाहरण है। फ़िल्म पत्रकारिता में 'बॉक्स ऑफ़िस' के लिए 'टिकट खिड़की' इसी तरह का अनुवाद है। पत्रकारिता के अपने पारिभाषिक शब्द होते हैं, जिनका अनुवाद करने के लिए अनुवादक को क्षेत्र और संदर्भ की जानकारी होनी चाहिए। जैसे-

 

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यद्यपि हिंदी में समाचार पत्रों और पत्रकारिता की सुदृढ़ और गौरवशाली परंपरा चली आ रही है, फिर भी आज समाचारों का मुख्य स्रोत अंग्रेज़ी होने के कारण कई बार हिंदी समाचारों की भाषा अंग्रेज़ी का शब्दानुवाद लगती है। अनुवादक को यहाँ सावधानी से काम लेना होता है ताकि लक्ष्य भाषा-पाठकों के लिए अनुवाद बोझिल न बने।