2. साहित्येतर अनुवाद
2.5. वाणिज्य-व्यवसाय और बैंकिंग के क्षेत्र में अनुवाद
आज वाणिज्य-व्यवसाय का युग है। बैंक आज की वाणिज्यिक व्यवस्था के मुख्य अभिकरण हैं इसीलिए बैंकों में हिंदी अधिकारी, हिंदी अनुवादक के माध्यम से द्विभाषिक स्थिति अपरिहार्य है। बैंकों का कामकाज दो स्तरों पर चलता है- एक आंतरिक बैंक प्रशासन और दूसरा बाह्य संचालन अर्थात् ग्राहकों के साथ संपर्क। पहले स्तर पर- स्थाई फ़ॉर्म या ऐसा साहित्य जिसमें बैंकिंग की कार्यविधि, अनुदेश, पुस्तिकाएँ, कर्मचारियों की आचार संहिताएँ, सेवा पुस्तिकाएँ और मुख्य एवं शाखा कार्यालयों से किया गया पत्राचार होता है। दूसरे स्तर पर सभी प्रकार के प्रपत्र या फ़ॉर्म, आवेदन पत्र, जमा पर्चियाँ, चेक, सूचनाएँ, विज्ञापन सामग्री आदि का समावेश होता है। आज बैंकों में बाह्य और आंतरिक सभी क्षेत्रों में हिंदी का प्रयोग अनिवार्य है। अंग्रेज़ी से अनुवाद होने के कारण अनुवादक को ध्यान में रखना पड़ता है कि उसकी भाषा अंग्रेज़ी की छाया से मुक्त रहे, वाक्य जटिल व बोझिल न हों, पारिभाषिक शब्दावली का प्रयोग संदर्भानुसार हो। चूँकि बैंकिंग का संबंध वित्तीय क्षेत्र में होता है, यहाँ भी विधि साहित्य के अनुवाद के समान सटीक, एकार्थी, सुस्पष्ट और मूलनिष्ठ अनुवाद करना आवश्यक है, लेकिन इस अनुवाद को पाठकों/ग्राहकों के लिए बोधगम्य भी होना चाहिएउदाहरण के लिए Governor का अर्थ है 'राज्यपाल', लेकिन रिज़र्वबैंक के गवर्नर को राज्यपाल नहीं कहा जा सकता। इसलिए इसे 'गवर्नर' ही रहने दिया गया है। इसी प्रकार कई शब्द हैं, जिनका बैंकों में विशिष्ट अर्थो में प्रयुक्त प्रयोग होता है, जैसे - Draft = प्रारूप (लेकिन बैंक में बैंक ड्राफ़्ट); Credit = साख, ऋण (जमा करना, उधार, जमा-शेष); Security= सुरक्षा (प्रतिभूति); Book = पुस्तक ( खाता) आदिबैंकिंग में भी शब्दानुवाद हमेशा सही नहीं होतामूल पाठ के कथ्य को स्पष्ट करने में अनुवाद पर्याय कैसे चुने जाएँ। उदाहरण के लिए-
मूल पाठ : The Cheque is out date.
अनुवाद- 1 : चेक गतावधिक है।
अनुवाद -2 : चेक की मियाद निकल चुकी है।
इनमें दूसरा अनुवाद बोधगम्य है जबकि पहला अनुवाद सही शब्दों का चयन होते हुए भी ग्राहक की समझ से परे हैं