2. साहित्येतर अनुवाद
2.4. विधि के क्षेत्र में अनुवाद
विधि साहित्य की भाषा प्रकृति से ही जटिल होती है क्योंकि किसी आदेश, नियम, क़ानून आदि का उल्लेख करते समय इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि मूल बातें, विचार सूत्र और मुद्दे पूरी तरह से समाविष्ट और स्पष्ट हो जाएँ, किसी प्रकार के द्विअर्थीकरण, अन्यथाकरण, संदेह या भ्रम की गुंजाइश न रह जाए। स्पष्ट है कि इसके अनुवाद में भी इन्हीं सब बातों का ध्यान रखा जाएगा। फिर भी, यह तो अनुवादक को ध्यान में रखना ही पड़ेगा कि लक्ष्य-पाठक या संबंधित व्यक्ति तक अनुवाद अपने सही कथ्य के साथ पहुँचे, अर्थात् अनुवाद बोधगम्य हो, भले ही इसके लिए अनुवादक को कुछ अंशों की व्याख्या देनी पड़े। नीचे एक मूल पाठ के दो अनुवाद दिये जा रहे हैं, पहला मूल पाठ का शब्दशः अनुवाद है जबकि दूसरा व्याख्यात्मक शैली में किंतु बोधगम्य है।
मूल पाठ : Whoever cheats and thereby dishonestly induces the person deceived to deliver any property to and person or to make alter or destroy the whole or any part of a valuable security or anything which is signed or sealed, any which is capable of being converted into a valuable security, shall be punished with impris- onment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
अनुवाद 1 : यदि कोई व्यक्ति छल करता है और एतद् द्वारा उस व्यक्ति को जिसे धोखा दिया गया है, बेईमानी से उत्प्रेरित करता है व कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे या किसी मूल्यवान प्रतिभूति को, या किसी वस्तु को जो हस्ताक्षरित या मुद्रांकित है और जो मूल्यांकन में संपरिवर्तित किये जाने योग्य है, पूर्णतः या अंशतः रच दे, परिवर्तित कर दे या नष्ट कर दे तो दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जायेगा और वह जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
अनुवाद 2 : जो कोई धोखा देता है और इस भाँति धोखे के शिकार हुए व्यक्ति की संपत्ति को बेईमानी से दूसरे को दे देने के लिए फुसलाता है, किसी मूल्यवान प्रतिभूति को, किसी मुहरबंद या हस्ताक्षरित वस्तु को जो मूल्यवान प्रतिभूति बन सकती है, पूर्णतः बदल देता है, गढ़ता है या नष्ट कर देता है, उसे सात वर्ष तक के (कठोर या साधारण) दोनों में से किसी प्रकार का कारावास अथवा जुर्माने को दंड दिया जाएगा।
स्पष्ट है कि विधि साहित्य की जाटिल और सम्मिश्र वाक्य संरचना को आवश्यकतानुसार तोड़कर छोटे- छोटे उपवाक्यों में अनुवाद करने से अनुवाद प्रेषणीय बनता है। अंग्रेज़ी की वाक्य-रचना SVO अर्थात् कर्त्ता-क्रिया-कर्म में होने के कारण हिंदी अनुवाद में बहुधा कुछ परिवर्तन तो करना ही पड़ता है क्योंकि हिंदी वाक्य में अन्विति SOV अर्थात् कर्त्ता-कर्म-क्रिया वाली होती है। इसके अतिरिक्त अंग्रेज़ी में कुछ शब्दों का पर्याय सावधानी से प्रयोग करना पड़ता है, जैसे shall, इसका अर्थ है- 'होगा' जबकि may का प्रयोग होना पड़ेगा- 'हो सकेगा'। उदाहरण के लिए Order shall be given का अनुवाद होता है- 'आदेश दिया जाएगा, जबकि Order may be given का अनुवाद होगा- 'आदेश दिया जा सकता है।'