2. साहित्येतर अनुवाद
2.1. साहित्येतर अनुवाद : सामान्य संदर्भ
साहित्येतर अनुवाद यूँ तो मूल निष्ठ होता है किंतु कोरा शाब्दिक अनुवाद इसे निष्प्राण और दुर्बोध बना देता है। संदर्भ के अनुसार पर्यायों का चयन अनुवादक की क्षमता और विवेक को दर्शाता है। उदाहरण के लिए To dismiss शब्द लिया जा सकता है। इसके दो पर्याय हैं- ख़ारिज करना, बर्खास्त करना। यदि 'मामला' हो तो 'ख़ारिज' प्रयोग में आएगा और यदि 'व्यक्ति' हो तो 'बर्खास्त' का प्रयोग होगा। अनुवादक को विषय पर अधिकार होना चाहिए। पारिभाषिक शब्दावलियाँ तो अनेक हैं, किंतु कब, किस संदर्भ में किस पारिभाषिक शब्द का प्रयोग किया जाए, यह विषय ज्ञान के बिना संभव नहीं। इसी तरह कुछ और मुद्दे हैं, जो हमारे देश की बहुभाषिकता, शिक्षा और साक्षरता, एक सर्वमान्य भाषा-नीति से जुड़े हैं, जैसे आज भी साहित्येतर क्षेत्र में कार्यालयीन और पत्रकारिता के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में अनुवाद की गति धीमी है। वैज्ञानिक साहित्य के अनुवाद के लिए पर्याप्त संदर्भ कोशों का अभाव, अधिकारी और मर्मज्ञ अनुवादकों का अभाव, अनुवाद - अधिकार और स्वत्वाधिकार (कॉपी राइट) की समस्या आदि इसके कारण हैं। यह भी देखा जाना चाहिए कि अनूदित सामग्री का यथोचित उपयोग हो रहा है या नहीं।