4. कथानुवाद

4.2. (क) पाठ का एक इकाई के रूप में प्रस्तुतीकरण

उपन्यास और कहानी में कई बार विभिन्न अंश एक-दूसरे के साथ जुड़े होते हैं। कई बार एक अंश को जाने बगैर दूसरे अंश का अर्थ स्पष्ट नहीं होता है। इस दृष्टि से पूरी कहानी या उपन्यास एक प्रोक्ति या इकाई होती है। अतः पाठ का सटीक अनुवाद तभी हो पाता है जब पूरी रचना को एक इकाई के रूप में ग्रहण किया जाता है।

अतः कथा-साहित्य के अनुवाद में उपन्यास को खंडों या अंशों में विभाजित कर उनका अनुवाद करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कथा-साहित्य में पूरी कृति को एक इकाई के रूप में ग्रहण करने से पर ही उस कृति का वास्तविक अर्थ स्पष्ट हो पाता है। क्योंकि उपन्यास या कहानी के अंश परस्पर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और उनके तारतम्य को देखे बिना अर्थ स्पष्ट नहीं होता। किसी उपन्यास या कहानी का पहला अनुच्छेद कृति के अंतिम अनुच्छेद से जुड़ा हो सकता है। अतः पहला अनुच्छेद समूची कृति की कुंजी होती है और अंतिम अनुच्छेद उसकी भावभूमि का आधार, इसका एक उत्तम उदाहरण भीष्म साहनी की कहानी चीफ़ की दावत है।

एक बात और, समग्र पाठ को एक इकाई के रूप में ग्रहण करने से अनुवादक की सर्जनात्मकता की जानकारी भी मिलती है, जो वाक्य-प्रति-वाक्य अथवा अध्याय-प्रति-अध्याय के अनुवाद में संभव नहीं है। इसलिए कथा-साहित्य के अनुवाद में सम्पूर्ण पाठ को एक इकाई के रूप में ग्रहण करते हुए अनुवाद करना चाहिए।