2. काव्यानुवाद

साहित्यिक विधाओं के अनुवाद को सर्वाधिक कठिन और चुनौतीपूर्ण बताया गया है। कुछ विचारकों के अनुसार तो काव्यानुवाद असंभव है। अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध विद्वान सैम्युअल जॉन्सन ने जैसे हार कर कह दिया था कि कविता का अनुवाद हो ही नहीं सकता। विक्टर ह्यूगो के अनुसार कविता के अनुवाद का विचार ही विवेकहीन और असंभव है। एच.डी. फॉरेस्ट स्मिथ ने कहा कि साहित्यिक कृति का अनुवाद पकाई हुई स्ट्रॉबेरी के समान स्वादहीन होता है। एक विद्वान ने विचार व्यक्त किया कि कविता का अनुवाद सूर्य की किरणों को तृण-रज्जु से बाँधने का प्रयास है। किसी ने कहा कि कविता के अनुवाद में जो अनूदित होने से छूट जाता है, वही कविता है। इसके बावजूद कविता का अनुवाद करने वाले अनुवादक हतोत्साहित हुए हों- ऐसी बात नहीं है। यह ठीक है कि कविता का अनुवाद करने में कठिनाइयाँ आती है, इसके लिए कविता की विशिष्ट संरचना ज़िम्मेदार है। कविता की रचना-प्रक्रिया, प्रेरणा और संपूर्ण संरचना में भाव प्रमुख होता है। भाव, अनुभूति और कल्पना का संश्लिष्ट वितान कविता है। काव्य, बिम्बों की सृष्टि करता है, काव्य का अनुवाद उन बिम्बों की पुनःसृष्टि करना है। इसलिए काव्य का लक्ष्य मात्र अर्थबोध कराना 'नहीं, बल्कि बिम्ब और चित्र के माध्यम से अनुभूति का सहभाग और सहभोग करना होता है। यह सहभाग और सहभोग करने वाला होता है सहृदय पाठक। अनुवादक को लक्ष्य भाषा के पाठकों को उसी अनुभूति का आस्वाद करना होता है, जो अनुभूति स्रोत भाषा में कविता के पाठकों को मिलती है।

कविता के प्रभाव और सम्प्रेषण की चर्चा करते समय यह बात भी ध्यान में रखी जानी चाहिए कि कविता में अकेले कथ्य का प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि कथ्य, शैली, शिल्प, संरचना और संवेदना की मिली-जुली सौंदर्यात्मक अनुभूति में पाठक को सहभागी बनाती है- कविता, इसलिए कविता के अनुवाद स्रोत भाषा से लक्ष्य भाषा की यात्रा के क्रम में इन सब तत्वों का सम्मिश्रण कर उसी मूल अनुभूति की पुनर्प्रस्तुति कठिन होती है। काव्य भी दो प्रकार का होता है- प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य । प्रबंध काव्य में कथा का आधार होने के कारण अनुवाद में भले ही थोड़ी आसानी हो, लेकिन मुक्तक काव्य, जिसके अंतर्गत गीत, प्रगीत, रुबाई, दोहे, क्षणिकाएँ आदि सब आते हैं- के अनुवाद में मूल पाठ के भाव और प्रभाव की पुनर्रचना करना बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य है । संक्षेप में काव्यानुवाद प्रमुख कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैं-

(अ) छन्दोबद्ध कविता

(आ) छन्दमुक्त कविता

(इ) अलंकारों का अनुवाद

(ई) बिम्ब, प्रतीक और मिथकों का अनुवाद

(उ) अनुवादक का व्यक्तित्व

(ऊ) सौंदर्य एवं संवेदना का सम्प्रेषण

इनके अतिरिक्त काव्यानुवाद में सांस्कृतिक संदर्भ, शैली और संरचना से जुड़ी अन्य समस्याएँ भी होती हैं, जिनकी चर्चा हम इसी पाठ में साहित्यिक अनुवाद की सामान्य समस्याओं के अंतर्गत करेंगे। यहाँ उन्हीं समस्याओं पर विचार किया जा रहा है, जो काव्यानुवाद से विशेष संबद्ध हैं।