एक भाषा (स्त्रोत भाषा) (भाषा1, (Source Language) की किसी सामग्री का दूसरी भाषा (लक्ष्य भाषा, भाषा2, Target Language) में रूपांतरण ही ‘अनुवाद’ है। पारिभाषिक शब्दों में कहें तो स्रोत भाषा में प्रस्तुत किसी सामग्री को उसे अर्थ में लक्ष्य भाषा में प्रस्तुत करना अनुवाद है। यह अनुवाद कार्य हिन्दी से भारतीय भाषाओं में (जैसे- तेलुगु, तमिल, मलयालम, गुजराती, उड़िया, बंगाली, पंजाबी आदि में) या भारतीय भाषाओं से हिन्दी में। इसके अलावा अंग्रेजी से हिन्दी, हिन्दी से अंग्रेजी या अन्य विदेशी भाषाओं में (जैसे- जर्मन, रूसी, जापानी आदि)। अनुवाद के इसी विशिष्टता को दूसरे शब्दों में विस्तार दिया जाता है कि अनुवाद मूलभाषा की सामग्री के भावों की रक्षा करते हुए उसे दूसरी भाषा में बदल देना है।
4. अनुवाद से साध्य
अनुवाद से साध्य को दो स्तरों में देखा जा सकता है- प्रथम राष्ट्र के स्तर पर और द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर परसंसार में अनेक राष्ट्र हैं। उनमें कुछ राष्ट्रों की एक ही भाषा हैकुछ राष्ट्र बहुभाषी जन-समूहों के राष्ट्र हैंभारत बहुभाषी देश हैबहुभाषी देश या राष्ट्र के विविध प्रांतों की जनता के बीच भावात्मक एकता एवं समरसता की स्थापना प्रमुख लक्ष्य होता है। भिन्न भाषा-भाषी जनता के परस्पर अवगा हन तथा सौहार्द्रपूर्ण व्यवहारों के लिए एक दूसरे की जानकारी आवश्यक हैयह अनुवाद से ही संभव हैडॉ. रामुलु ने अपनी पुस्तक 'अनुवाद : स्वरूप और प्रक्रिया' में इस दिशा में संकेत करते हुए कहा है- “एक जीवित समाज के लिए भावी जीवन को प्रगति पथ पर अग्रसर होने के लिए अनुवाद उपयोगी सिद्ध होगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अनुवाद का महत्व प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।” (पृ. 2) विचारों और ज्ञान- विज्ञान के क्षेत्र आदान-प्रदान का एक मात्र आधार अनुवाद ही है। डॉ. रामुलु ने ऊपर प्रस्तावित पुस्तक में अनुवाद को महत्व प्रदान करने वाले निम्न ग्यारह उद्देश्यों को प्रतिपादित किया है-
भावात्मक एकता
आपसी समन्वय
ज्ञान वृद्धि
अन्य संस्कृतियों से परिचय
सांस्कृतिक एकता
अन्य राष्ट्रों की जानकारी
अभिव्यक्ति में प्रसार
विधि - न्याय संबंधी गवेषणाएँ
शोध कार्य व्यापार वृद्धि
परंपरा और संस्कृति की रक्षा
यह साध्य लक्ष्यों की सूची और बढ़ सकती हैसंक्षेप में कहा जा सकता है कि विश्व चिंतन की दिशाओं से संसार के हर कोने में रहने वाला समूह संपर्क स्थापित कर अनुवाद के ज़रिए अपने को संपन्न बना सकता है। प्राचीन विश्वजनीन विचारों से लेकर वर्तमान के बहुमूल्य वैज्ञानिक, तकनीकी तथा शासकीय ज्ञान तक को अनुवादों के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।
आज का युग सब प्रकार के ज्ञान को, सब प्रकार की आवश्यकताओं की जानकारी को सब लोगों तक पहुँचाने की दिशा में दौड़नेवाला युग है। ज्ञान-विज्ञान का विकास विश्व की विस्तृत सीमाओं में संपन्न हो रहा हैइस विकास को किसी प्रांत, देश, भाषा, मानव समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जा सकता हैयह भी सत्य से दूर है कि आधुनिक विज्ञान का विकास मात्र अंग्रेज़ी के माध्यम से ही हो रहा हैवह सभी विकसित और विकासशील देशों में हो रहा है। विकास की सीमाएँ अनंत हैं। ज्ञान वास्तव में ज्ञान होता है, सत्य होता है, चाहे वह किसी भी भाषा के माध्यम से आविष्कृत हुआ होकोई भी समाज अपनी भाषा में इस प्रकार आविष्कृत ज्ञान-विज्ञान को किसी भी भाषा स्रोत से अवतरित करना चाहता है तो यह अनुवाद के माध्यम से ही होगाइस दिशा में आगे बढ़ना आप सबकी अपरिहार्य आवश्यकता है। इसीलिए 'अनुवाद' आज के युग में महत्वपूर्ण है।