इकाई 2: अनुवाद की प्रक्रिया और प्राविधि
1. अनुवाद की प्रक्रिया और प्राविधि
1.12. घ) भावानुवाद
क) भावानुवाद
भावानुवाद शब्दानुवाद का ठीक उल्टा है। इस प्रकार में मूल पाठ के भाव को आधार बनाकर अनुवादक लक्ष्य भाषा की स्वाभाविकता और सम्प्रेषणीयता को ध्यान में रखकर अनुवाद करता है। इसमें मूल पाठ के शब्दों और भाषा पर ध्यान नहीं रहता, बल्कि भाव और अर्थ पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। भावानुवाद कई स्तरों पर किया जाता है जैसे- पदबंध स्तर पर ‘भारत में पैदा होने वाला गेहूँ’ का अँग्रेज़ी अनुवाद- ‘Indian Wheat’, कभी कई वाक्यों-उपवाक्यों को मिलाकर एक वाक्य में भावानुवाद कर दिया जाता है, कभी पूरे एक अनुच्छेद का भावानुवाद दो-चार वाक्यों में कर दिया जाता है। भावानुवाद का उपयोग ऐसी विशिष्ट सांस्कृतिक और सौंदर्यात्मक अभिव्यक्तियों के लिए किया जाता है, जहाँ शब्दानुवाद संभव या उपयुक्त नहीं होता। उदाहरण के लिए-
मूल : Cock and bull story.
अनुवाद : बेसिर-पैर की बात।
मूल : Apple of discord.
अनुवाद : झगड़े की जड़।
भावानुवाद का प्रयोग विशेषकर मुहावरों और लोकोक्तियों के अनुवाद में होता है जहाँ मूल पाठ के समानार्थी भावों के सूचक पर्यायों का प्रयोग किया जाता है, जैसे-
मूल : Cast in the same mould.
अनुवाद : एक ही थैली के चट्टे-बड़े।
मूल : To rain cats and dogs.
अनुवाद : मूसलाधार पानी बरसना ।
साहित्यिक सामग्री के अनुवाद में विशेषकर भावानुवाद का प्रयोग ही किया जाता है, क्योंकि ऐसी सामग्री में शब्द नहीं, बल्कि अर्थ प्रधान होता है। कविता के अनुवाद में भावानुवाद लगभग अपरिहार्य बन जाता है, क्योंकि कविता शब्द, अर्थ और संवेदना से युक्त एक सौंदर्य-कृति होती है। फिट्ज़राल्ड की पंक्ति का हरिवंशराय बच्चन द्वारा किया गया अनुवाद देखिए-
मूल : I came like water, and like wind I go.
अनुवाद : लिए आया था अश्रु प्रवाह छोड़ता जाता हूँ उच्छ्वास।
यहाँ शाब्दिक अनुवाद होता - मैं आया पानी की तरह, और जाता हूँ हवा की तरह। लेकिन बच्चन जी ने इसके मूल भाव को पकड़ा और अनुवाद में उसे उतारने की कोशिश की। भावानुवाद में अनुवादक की रचनात्मक प्रतिभा की ज़रूरत होती है।