इकाई 2: अनुवाद की प्रक्रिया और प्राविधि

1. अनुवाद की प्रक्रिया और प्राविधि

1.11. ग)   शब्दानुवाद

क)    शब्दानुवाद

कोई भी मूल पाठ सबसे पहले शाब्दिक संरचना होता है, इसलिए शब्द-प्रतिशब्द अनुवाद मूलनिष्ठ अनुवाद की पहली शर्त होती है। लेकिन ऐसा करने में अनुवाद अटपटा हो जाता है। उदाहरण के लिए-

मूल : I am going home.

अनुवाद : मैं जा रहा हूँ घर।

अँग्रेज़ी-हिंदी की वाक्य संरचना में भिन्नता के कारण यहाँ अटपटापन है। अँग्रेज़ी वाक्य-रचना में कर्ता के बाद क्रिया आ रही है जबकि हिंदी वाक्य में क्रिया अंत में होनी चाहिए, अर्थात अनुवाद होना चाहिए-मैं घर जा रहा हूँ।

इसका मतलब है कि शब्द-प्रतिशब्द अनुवाद में अनुवादक यदि लक्ष्य भाषा की संरचना को ध्यान में रखे और उसके अनुसार शब्दों को रखे तो अनुवाद ठीक होगा, लेकिन शब्दानुवाद या शाब्दिक अनुवाद की अपनी सीमाएँ हैं। जहाँ भाषा सतही सरंचना से गहन संरचना में प्रवेश करती है और अभिधा से बढ़कर लक्षणा और व्यंजना का प्रयोग होने लगता है, वहाँ शब्दानुवाद असफल हो जाता है। गहन अर्थ वाली अभिव्यक्तियाँ, सांस्कृतिक संदर्भों से जुड़ी अभिव्यक्तियाँ और अभिव्यंजना-सौंदर्य शब्दानुवाद के माध्यम से प्रकट नहीं हो सकते। जैसे-

मूल : डाक्टर ने मरीज़ की नब्ज़ देखी।

अनुवाद :  The doctor saw the pulse of the patient.

होना चाहिए : The doctor felt the pulse of the patient

शाब्दिक अनुवाद प्रायः सूचना प्रधान साहित्य के अनुवाद में किया जाता है, जैसे कार्यालयीन प्रशासनिक साहित्य, वैज्ञानिक साहित्य, विधि साहित्य, तकनीकी व तथ्यपरक साहित्य। शब्दानुवाद के माध्यम से मूल कृति का प्रामाणिक और यथावत अनुवाद प्रस्तुत किया जाता है।