इकाई 2: अनुवाद की प्रक्रिया और प्राविधि
1. अनुवाद की प्रक्रिया और प्राविधि
1.5. पाठ विश्लेषण
अनुवाद के संदर्भ में अनुवादक को पाठ का विश्लेषण कर लेना चाहिए। पाठ विश्लेषण का सामान्य अर्थ होता है मूल पाठ (Original Text) के संदेश को स्पष्ट-सुलझे रूप में विश्लेषित कर लेना। यह प्रथमतः एक अनिवार्य प्रक्रिया है। पाठ के दो पक्ष होते हैं- विषय वस्तु और भाषा। विषय वस्तु गंभीर, सूक्ष्म और अपनी परिधि में विस्तृत होती है। वस्तु विश्लेषण के स्तर पर अनुवादक को मूल भाषा-समाज की अवधारणाओं को वस्तुपरक दृष्टि से (Objective outlook) परखना होता है। विज्ञान के क्षेत्र में तो और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। भाषा के स्तर पर विश्लेषण की प्रक्रिया में भाषा वैज्ञानिक दृष्टि को अपनाकर आगे बढ़ना होगा। भाषा वैज्ञानिक विश्लेषण का संबंध संरचनात्मक विवरणों से और स्रोत भाषा-भाषियों की सांस्कृतिक-सामाजिक एवं मानसिक वास्तविकताओं से है। इस स्तर पर अनुवादक एक अध्येता और अनुसंधाता होता है, होना भी चाहिए। एक सच्चे पाठक की भूमिका निभाते हुए अनुवादक मूल पाठ के प्रति अपनी निष्ठा और प्रतिबद्धता का परिचय देता है। विषय के स्पष्ट ज्ञान के अभाव में अनुवाद सफल नहीं हो सकता।
पाठ विश्लेषण का महत्वपूर्ण अंश संदर्भ है। पाठ से संबंधित विषय वस्तु का विश्लेषण संदर्भ के साथ जोड़ कर करना अत्यंत आवश्यक है। संदर्भ के बिना अर्थ निर्धारण असंभव होता है। संदर्भ के साथ-साथ कुछ और ध्यातव्य पक्ष हैं, जिनकी ओर अनुवादक की दृष्टि जानी चाहिए। वे हैं- देश, समाज विशेष (ज्ञान विशेष), काल (ऐतिहासिक संदर्भ) और सांस्कृतिक एवं दार्शनिक भूमिका।
पाठ विश्लेषण के भाषिक पक्ष में भाषा संरचना विधान की सही पहचान अनुवादक के सामने आती है। इस संदर्भ में दो पक्ष उभरते हैं- संरचना पक्ष और प्रयोग पक्ष। संरचना पक्ष में मूल भाषा की भाषिक व्यवस्था की पहचान की बात है। इसके अंतर्गत शब्द, पदरूप, लिंग, वचन, समास रचना, नए शब्द सृजन की प्रक्रिया आदि का विश्लेषण होता है। प्रयोग पक्ष के संदर्भ में शब्द-शक्ति, व्यंग्यात्मक प्रयोग, मुहावरे और लोकोक्तियाँ, बलाघात, अनुतान आदि के द्वारा अर्थ संप्रेषण की स्थितियों का विवरण विश्लेषण प्रधानता प्राप्त करते हैं।