इकाई -1: अनुवाद : अर्थ, परिभाषा, स्वरूप और क्षेत्र
1. अनुवाद : अर्थ, परिभाषा, स्वरूप और क्षेत्र
1.2. विषय प्रवेश
मनुष्य द्वारा अपने भावों, विचारों, उद्देश्यों आदि को दूसरों तक संप्रेषित करने के लिए उपयोग में लाया जानेवाला साधन ‘भाषा’ है। ‘भाषा’ मानव मात्र के लिए प्राप्त विशिष्ट स्वरयंत्र द्वारा प्रसारित होने वाले सार्थक ध्वनि संकेतों की समष्टि है। इसका संबंध मात्र भावावेगों और क्रिया-कलापों से ही नहीं, जाति, संस्कृति, सभ्यता, धर्म, ज्ञान-विज्ञान आदि अनेक से जुड़ा रहता है। किसी विषय से संबंधित जानकारी के लिए भाषा का सहारा लेना आवश्यक है। कहने का सार है कि बिना भाषा के सहयोग के मानव जीवन का एक दिन भी बीतना असंभव है, किंतु भाषा का उद्भव और विकास मानव समूह और उस समूह के वास क्षेत्र की सीमाओं तक ही सीमित होता है। इसीलिए विश्व में अनेक भाषाओं की स्थिति है।
मानव का आरंभिक जीवन चाहे अपने क्षेत्र की परिधि में ही व्यतीत हुआ हो, पर आज वह अपने क्षेत्र तक सीमित होकर रह नहीं सकता। मानव की आवश्यकताएँ उसे दूसरे क्षेत्रों तक ले जाती रही हैं। आज मानव की अनेक क्षेत्रगत सीमाएँ बन गयी हैं- गाँव, प्रांत, राष्ट्र और विश्व। गाँव से प्रांत तक के विस्तार में मानव का संबंध एक भाषा से चाहे संभव हो, परंतु प्रांत, राष्ट्र और विश्व की सीमाओं में मानव एक भाषा से काम निकाल नहीं सकता। आज का विश्व एक गाँव बन गया है। ऐसी स्थिति में मानव अनेक भाषाओं को सीखकर अपना व्यवहार सिद्ध नहीं कर सकता। विश्व की अनेक भाषाओं में साध्य व्यवहार को अपनी भाषा से संपन्न करना। यह संभव नहीं है। इसका समाधान करनेवाली एक मात्र प्रक्रिया ‘अनुवाद’ है। विचार विनिमय की दृष्टि से और सामंजस्य स्थापना की दृष्टि से विश्व में एक भाषा से काम नहीं चलता। अनेक भाषाओं के बीच में से यह संपन्न होता है। यह भी सत्य है कि वैश्विक धरातल पर कुछ भाषाओं में ज्ञान-विज्ञान द्रुत गति से विकसित हो रहा है। इसे स्वीकारने और अपने समूह को संपन्न बनाने का दायित्व हर मानव-समूह (प्रांत और राष्ट्र) पर है। भारत विश्व के देशों में भाषाओं की स्थिति को लेकर एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह अनेक भाषाओं का राष्ट्र है। आज भारत के सामने अपनी जनता की नयी आवश्यकताओं को साधने की समस्या है। इस दिशा में ‘अनुवाद’ अपना महत्वपूर्ण कर्तव्य निभा सकता है और निभा रहा है।
आज की आवश्यकताओं एवं विज्ञान के नये आविष्कारों के कारण जिस ज्ञान तक सामान्य को भी ले जाने की जरूरत है, तदर्थ ‘अनुवाद’ का सहारा लेना अनिवार्य है। इसीलिए आज हर नागरिक का, जो एक से अधिक भाषाएँ जानता है, कर्तव्य है कि वह अनुवाद प्रक्रिया से अच्छी तरह से अवगत हो और अनुवाद की क्षमता प्राप्त करें।