साहित्यिक अनुवाद की प्रकृति
4. कथानुवाद
4.5. (घ) मुहावरे और लोकोक्तियों का पुनर्विन्यास
कई बार लेखक उपन्यास या कहानी में मुहावरे और लोकोक्तियों का प्रयोग करता है। कथा साहित्य में मुहावरे और लोकोक्तियों के प्रयोग से संप्रेषण में पैनापन आता है और संदेश की अभिव्यक्ति सहज तथा यथार्थ रूप में होती है। अतः मुहावरे और लोकोक्तियों के अनुवाद में यह ध्यान रखना पड़ता है कि लक्ष्य भाषा में इनके समतुल्य अपने प्रकार्य में वही विशिष्ट भूमिका निभाए। इस प्रक्रिया में कभी-कभी पुनर्विन्यास का सहारा लेना भी पड़ता है। उदाहरण के लिए – (1) Jack of all trades, (2) to escape by a hair’s breath , (3) Better late than never का पुनर्विन्यास हिन्दी में क्रमशः ‘हरफ़न मौला’, ‘बाल-बाल बचना’, ‘देर आए दुरस्त आए’ के रूप में किया जाता है। किंतु कई बार भाषा की सामाजिक सांस्कृतिक, पौराणिक, ऐतिहासिक, पृष्ठभूमि के कारण मुहावरे अलग-अलग अर्थ लिए होते हैं, इनके समतुल्यों के निर्धारण में अनुवादक को सतर्कता बरतनी पड़ती है। उदाहरण के लिए – अंग्रेजी भाषा में lamb (मेमना) सीधेपन का प्रतीक है जो हिन्दी में ‘गऊ’ या ‘गाय’ के रूप में मिलता है। ‘He is like a lamb’ का हिन्दी अनुवाद ‘वह गऊ या गाय है’ सटीक है। किंतु ‘lamb’ की हर अभिव्यक्ति के लिए ‘गऊ’ या ‘गाय’ का समतुल्य अर्थ नहीं हो सकता। जैसे –‘ईसा मसीह’ के लिए अंग्रेजी में ‘The lamb’ या ‘lamb of the god’ अभिव्यक्ति का प्रयोग होता है। इसी प्रकार ‘lamb’ से संबंधित अन्य मुहावरे भी हैं : (1) Mutton dressed like a lamb – बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम, (2) Wolf in a lamb’s kind – रंगा सियार और (3) God tempers the wind to the shorn lamb – जाको राखे साइयाँ मार सके न कोय; बाल न बाँका कर सके, जो जब बैरी होय।