साहित्यिक अनुवाद की प्रकृति
5. साहित्यिक अनुवाद और सांस्कृतिक संदर्भ
साहित्यिक अनुवाद एक भाषा की संस्कृति का भी दूसरी भाषा में अंतरण है। इसलिए सांस्कृतिक अनुवादक के लिए बड़ी चुनौती बनता है। भाषा, संस्कृति की संवाहिका होती है और देश, जाति या समाज के आचार-विचार का समन्वित रूप होती है। आचार का संबंध जीवन-स्थितियों की भौतिक अभिव्यक्ति से है, जिसमें रहन-सहन के तौर-तरीके, मकान, भवन, रास्ते-उनका निर्माण और अलंकरण, वेशभूषा, खान-पान, अभिवादन के तरीके, शिष्टाचार आदि सभी गोचर रूप से आते हैं, जबकि विचार पक्ष के अंतर्गत मूल्य, विश्वास, कर्मकाण्ड, अनुष्ठान, मान्यताएँ, रीति-रिवाज, दर्शन, कला, सौंदर्य चेतना आदि सूक्ष्म रूप होते हैं। अनुवादक के लिए कठिनाई यहीं होती है। सूत्र रूप में इसे यूँ समझा जा सकता है कि स्रोत भाषा और लक्ष्य भाषा के बीच सांस्कृतिक रूप से दूरी जितनी अधिक होगी, अनुवाद उतना नहीं कठिन होगा, यह दूरी जितनी कम होगी, अनुवाद उतना ही सरल होगा। भारतीय भाषाएँ एक सांस्कृतिक परिवेश से जुड़ी हुई है, इसलिए एक भारतीय भाषा से दूसरी भारतीय भाषा में सांस्कृतिक संदर्भ का अंतरण अंग्रेज़ी और अन्य विदेशी भाषाओं की तुलना में आसान होता है। ऐसे अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं। 'कामायनी' के अंग्रेजी अनुवादकों में से एक भी 'यज्ञ' शब्द का समतुल्य अनुवाद करने में सफल नहीं हुआ क्योंकि यह संभव ही नहीं है। 'यज्ञ' एक कर्मकाण्ड है, अनुष्ठान है, न तो Bonafire इसका समानार्थी हो सकता है, न Holy fire और न ही Fire, जबकि 'कामयानी' के तेलुगू और संस्कृत अनुवादों में यह समस्या आई ही नहीं। इसी प्रकार प्रेमचंद्र की कहानी 'बाबाजी का भोग' का दो लोगों ने अंग्रेजी में अनुवाद किया। इसमें 'साधु' शब्द के लिए अंग्रेजी अनुवादक ने 'Wandering holy man' के रूप में व्याख्यात्मक अनुवाद किया जबकि भारतीय अनुवादक पी. लाल ने 'Sadhu' शब्द ही रहने दिया। सांस्कृतिक संदर्भों के अनुवाद में प्रायः अनुवादक मूल शब्द को ज्यों का त्यों रहने देते हैं और पाद-टिप्पणी दे देते हैं। यही हाल विचारधारात्मक प्रतीकों का होता है। 'कामायनी' के अंग्रेजी अनुवाद में ऐसे शब्द हैं, जो मूल पाठ के प्राण हैं, लेकिन उनका सटीक अनुवाद नहीं हो सकता, जैसे Bliss का उपयोग 'आनंद' के लिए नहीं किया जा सकता क्योंकि 'आनंद' केवल अनुभूति नहीं, एक दार्शनिक प्रतिपति है। एक अनुवादक ने 'आनंद' के लिए 'Joy' शब्द का प्रयोग किया जो मूल अर्थ अन्याय है। सांस्कृतिक संदर्भ में मुहावरे और लोकोक्तियों का अनुवाद भी आता है। अनुवादक के लिए सामाजिक संबंधों या रिश्तों-नातों की शब्दावली का अनुवाद भी कठिन होता है, क्योंकि अलग-अलग भाषाओं में ये संबंध अलग-अलग अर्थ- छवि लिये होते हैं। अंग्रेजी में सास-ससुर, बहू, दामाद, बहनोई, भाभी के लिए, Father-in-law, Mother-in-Law, Daughter-in-law, Son-in-law आदि शब्द हैं, जिनमें जुड़ा हुआ in law शब्द इन संबंधों की आत्मीयता को खंडित करता प्रतीत होता है। भारत में विशेष कर दक्षिण भारत में नाते-रिश्ते की शब्दावली कुछ भिन्नता लिये होती है, उदाहरण के लिए 'मामा' शब्द माँ के भाई के लिए भी प्रयुक्त होता है और 'ससुर' के लिए। 'अत्ता' शब्द 'बुआ' के लिए भी है और 'सास' के लिए भी। सांस्कृतिक संदर्भ से जुड़ी शब्दावली को डॉ. अर्जुन चह्वान ने अपनी पुस्तक 'अनुवाद: समस्याएँ एवं समाधान' में कुल 10 उपशीर्षकों के अंतर्गत विस्तार से विवेचित कर संभावित समाधान भी सुझाये हैं।