साहित्यिक अनुवाद की प्रकृति
2. काव्यानुवाद
2.2. छंदमुक्त अनुवाद
कम छन्दोबद्ध रचना का अनुवाद मुक्त छन्द में किया जा सकता है, इसे गद्यानुवाद भी कहा जाता है। मूल रचना भी मुक्त छन्द में हो सकती है। मुक्त छन्दानुवाद, या छन्दमुक्तानुवाद या गद्यानुवाद महत्वपूर्ण नहीं होता क्योंकि मुक्त छन्द की भी अपनी लय होती है, अपना प्रवाह होता है, अपनी सहजता होती है। इसके लिए अनुवादक को मूल पाठ में कुछ जोड़ना, कुछ छोड़ना और कुछ बदलना होता है। उदाहरण के लिए बोरिस पास्तरनाक की कविता 'The Wind' ली जा सकती है, जिसका अनुवाद धर्मवीर भारती ने किया है और प्रवाह व लय को बनाए रखने के लिए काफ़ी कुछ परिवर्तन किया है।
मूल पाठ
This is the end of me but you live on.
the wind, crying and complaining,
Rocks the house and the forest,
not each pine-tree separately with the whole boundless distance,
like the hulls of sailing ships. Ridding as anchor in a bay
It shakes them not out of mischief,
and not in aimless fury
but to find for you, out of its grief,
words of a lullaby.
अनुवाद
मैं व्यतीत हुआ, पर तुम अभी हो, रहो।
हवा, चीखती-चिल्लाती हुई हवा-झकझोर रही है
मकानों को, जंगलों को
चीड़ के अलग-अलग पेड़ों को नहीं
वरन् सबों को एक साथ-तमाम सीमाहीन दूरियों को-
किसी खाड़ी में लंगर डाले हुए, लहरों पर उठते-गिरते हुए
तमाम जहाज़ों की तरह
और हवा उन्हें झकझोर रही है
केवल चंचलतावश नहीं
न निष्प्रयोजन क्रोध से अंधी होकर वरन् अपनी चरम पीड़ा में से
मंथन में से,
तुम्हारी लोरी के लिए उपयुक्त शब्द
खोजते हुए।