अनुवाद का स्वरूप
6. अनुवाद के प्रकार : परिचय
साहित्यिक अनुवाद : प्रकार
स्थूल रूप से साहित्यिक अनुवाद तीन प्रकार के माने जाते हैं :
अ) शब्दानुवाद : मूल कृति या वक्तव्य का शब्दश: भाषांतर करना
उदा. : माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठित:
न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा ।।
माँ, शत्रु और पिता दुश्मन जो बालक को पढ़ाते नहीं।
सभा के बीच वह नहीं शोभा देता जैसे हंसों के बीच कौआ ।
आ) भावानुवाद : मूल पाठ का भाव अनुवाद में लाना। यहाँ हर शब्द का तर्जुमा नहीं होता बल्कि भावार्थ होता है। वही उदाहरण लेते हैं जो माता-पिता अपनी संतान को अच्छी शिक्षा नहीं देते वे उसके जन्म-दाता नहीं बल्कि शत्रु होते हैं क्योंकि उचित शिक्षा, पठन-पाठन, संस्कार के अभाव में वह बालक समाज में समुचित व्यवहार न कर पाने के कारण, हंसों के मध्य कौए की भाँति हँसी का पात्र बन सकता है।
इ) छायानुवाद : ऐसे अनुवाद में शब्द या भावों के स्थान पर केवल मूल पाठ के कथन की छाया आती हैयह अनुवाद मूल पाठ से बड़ा भी हो सकता है और छोटा भी । वही उदाहरण : अपनी संतान को समुचित शिक्षा न देकर उनका केवल भरण- पोषण करने वाले माँ-बाप तो उनके दुश्मन ही हैं क्योंकि ऐसे बच्चे अपमानित जीवन जीने को बाध्य होते हैं।
साहित्यिक अनुवाद में इन भेदों के अलावा कई भेद और मिलते हैं जिन पर विचार किया जाना -अनुवादक के लिए ज़रूरी है।
क) पद्यरूप में अनुवाद : समश्लोकी, समान छंद में, अलग छंद में और मूल से छोटे या मूल से बड़े आकार में अनुवाद |
ख) गद्यरूप में अनुवाद : कथा-कहानी का अनुवाद, उपन्यास का अनुवाद । नाटकानुवाद आदि ।
इनके अलावा सिनेमा के लिए अनुवाद, टी.वी. (छोटे पर्दे) के धारावाहिकों के लिए अनुवाद, थाएँ, चरित्र, लीलाएँ, बालकों के लिए अनुवाद, किशोरों के लिए अनुवाद, पाठ्य पुस्तकों में (पाठ्यक्रम अनुसार) अनुवाद, गृह-काजी महिलाओं के लिए अनुवाद, ज्ञान एवं मनोरंजन के लिए अनुवाद, ज्ञान मनोरंजन दृष्टि से पहेलियाँ, मुहावरे आदि, विज्ञापनों का अनुवाद, फ़िल्मी गीतों का अनुवाद, भाषणों अनुवाद |
फिर विषय के अनुसार भी साहित्यिक अनुवाद के अनेक भेद होते हैं। उदा : सामाजिक, ऐतिहासिक, ननैतिक, वैज्ञानिक, धार्मिक, शैक्षणिक, चरित्र-आत्म- तिलिस्मी, सत्यकथा, जासूसी, काल्पनिक आदि ।
समग्र रूप से अनुवाद के प्रकारों को निम्न आरेख के माध्यम से समझ सकते हैं
