अनुवाद का स्वरूप
3. अनुवाद का महत्त्व
अनुवाद अन्य भाषाओं में प्राप्त उद्भावनाओं, संवेदनाओं, संवेगों, विचारों, ज्ञान-विज्ञानगत बोध और वि शेषताओं आदि को अपनी भाषा में संप्राप्त करने का एक सक्षम माध्यम है। जब कोई व्यक्ति या समाज मूल भाषा तक पहुँच नहीं सकता तब किसी मूल भाषा में प्राप्त एवं अपने लिए ग्राह्य के अवगाहन के लिए अनुवाद एक मात्र आधार बनता है। एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद प्रक्रिया की जटिलता को देखक र विचारकों में विश्वास फैला है कि यथा मूल अनुवाद असंभव है, फिर भी अनुवाद कार्य रुका नहीं। अनुवाद के क्षेत्र दिन-ब-दिन विस्तृत होते जा रहे हैं और अनुवाद को एक ओर गहन अध्ययन और शोध के आधार विज्ञान के धरातल पर प्रतिकृति करने के प्रयास हुए हैं तो दूसरी ओर पुन: सृजन एवं अनुसृजन की प्रक्रिया से युक्त होने के कारण उसे कला का दर्जा भी दिया गया है। आजकल अनुवाद अध्ययन को अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान (Applied linguistics) का गौरव भी मिला है। अनुप्रयुक्त भाषा वैज्ञानिक विश्लेषण अनुवाद के भाषिक पक्ष को अनेक कोणों से परीक्षण कर सैद्धांतिक रूप प्रदान करता हैपहले कहा जा चुका है कि आधुनिक युग अनुवाद का युग है। यह अनुवाद को एक महत्त्वपूर्ण स्थान प्रदान करता है अनुवाद कार्य को इतना महत्त्व क्यों? अनुवाद के द्वारा साध्य एवं मानव समूह के लिए लाभकारी तत्त्व कौन-कौन से हैं? आइए चलें इनके अन्वेषण में ।