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ज्ञान प्रधान, सूचना प्रधान या प्रयोजनमूलक सामग्री साहित्येतर सामग्री कहलाती हैसाहित्य मूलत: सृजनात्मक होता है, जिसमें कल्पना और रचनात्मक प्रतिभा की मुख्य भूमिका होती है जबकि ज्ञानात्मक या ज्ञान प्रधान या सूचनापरक प्रयोजनमूलक सामग्री मानव जीवन के उन सभी कार्यकलापों से संबंधित होती है जो एक यथार्थपरक, तथ्यात्मक और प्रयोजनबद्ध जीवन जीने के लिए आवश्यक होती हैं। अर्थात् मानव जीवन के क्रियाकलाप असीमित हैं। इन क्रियाकलापों के कारण विज्ञान तकनीकी व प्रौद्योगिकी, समाज विज्ञान जिसमें राजनीति से लेकर अर्थशास्त्र तक सम्मिलित हैं, वाणिज्य, व्यवसाय, प्रशासन तंत्र और संचार माध्यमों तक का विस्तृत व्यापक, बहु-आयामी जीवन-तंत्र विकसित हुआ । - आज मानव-जीवन के इस विशाल और विराट तंत्र में विभिन्न भाषाओं के जंजाल में एक ही सेतु है, संप्रेषण का एक ही सूत्र है और वह है- अनुवाद। साहित्यिक और साहित्येतर- ये दो क्षेत्र परस्पर पूरक हैं, इन दोनों के मेल से ही मनुष्य आनुभविक यथार्थ और कल्पनात्मक सौंदर्य सृष्टि का आस्वादन करता है और इस आस्वादन में माध्यम बनता है- अनुवाद। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हमारे देश के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में ज्ञान-विज्ञान और प्रशासन तंत्र का जो अभूतपूर्व प्रसार हुआ, उसमें अनुवाद एक अपरिहार्य माध्यम बनकर उभरा।