अनुभाग की रूपरेखा

  • अनुवाद एक भाषा में व्यक्त सामग्री का दूसरी भाषा में अंतरण है। भाषा में व्यक्त सामग्री कोई जड़ पदार्थ नहीं होती, जिसे एक से दूसरी जगह ले जाया जाए और ना ही भाषा कोई भौतिक आधार या पात्र होती है, जिससे सामग्री को उठाकर अन्यत्र में रख दिया जाए। भाषा, संस्कृति की संवाहिका होती है, किसी भाषा में व्यक्त सामग्री उस भाषिक संस्कृति की अभिव्यक्ति होती है, इसीलिए एक भाषा की संस्कृति, चेतना और संवेदना को दूसरी में पुन: प्रस्तुत करना अनुवाद होता है। यह बात साहित्यिक अनुवाद में विशेष कर

    उल्लेखनीय होती है, जहाँ किसी रचना की विषय-वस्तु और शैली-शिल्प को ही न केवल दूसरी भाषा में अनुवाद किया जाता है, बल्कि उस रचना के अभिव्यंजना-सौन्दर्य, सांस्कृतिक चेतना और संवेदना को भी दूसरी भाषा के पाठकों के लिए अनुभूत्य और संप्रेष्य बनाना अनुवादक का दायित्व होता हैसाहित्यिक अनुवाद की प्रकृति और अपेक्षाएँ साहित्येतर सामग्री के अनुवाद से सर्वथा भिन्न होती है साहित्यिक अनुवाद में वस्तुतः साहित्यिक विधाओं की भिन्नता के अनुसार भिन्न-भिन्न समस्याओं, प्रविधियों, शर्तों और प्रयासों से अनुवादक को गुज़रना होता है। कहा जा सकता है कि साहित्यिक अनुवाद रचना की पुनर्रचना होती है।